
लौरिया प्रखंड कृषि कार्यालय परिसर में गुरुवार को प्राकृतिक खेती विषय पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सह गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक रहित, कम लागत और अधिक उत्पादक कृषि तकनीकों से परिचित कराना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माधोपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हर्षा ने कहा कि बदलते मौसम और लगातार गिरती मिट्टी की उर्वरता के बीच प्राकृतिक खेती आज के समय की सबसे प्रभावी और टिकाऊ तकनीक बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि गौ-गोबर, गौ-मूत्र, दाल का बेसन, नीम की पत्ती, नीम खल्ली, बीजामृत और जीवामृत जैसे देशज संसाधनों से तैयार पाउडर और घोल फसलों को कीटों से सुरक्षा देने के साथ-साथ मिट्टी को भी ताकत प्रदान करते हैं।

डॉ. हर्षा ने जोर देकर कहा कि इन प्राकृतिक तरीकों से खेती करने पर उत्पादन लागत घटती है, फसल की गुणवत्ता बढ़ती है और किसान रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर निर्भर हुए बिना बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षण में शामिल कृषि सखियों ने भी किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया और इसके व्यवहारिक तरीकों की जानकारी दी। वही कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड कृषि पदाधिकारी केशव किशोर ने की।

मौके पर अशोक पांडे, उमेश राम, अजयनाथ तिवारी, शमीम अफजल, मनीष कुमार, लालबाबू पांडे, मनीष सिंह, अर्जुन सिंह, वीरेंद्र प्रसाद, एटीएम ओमेश कुमार, बीटीएम संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों में दिखा उत्साह बताता है कि क्षेत्र में टिकाऊ कृषि की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव तेज़ी से आकार ले रहा है।

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