प्रभात इंडिया न्यूज़ | उमाशंकर प्रसाद |बगहा 

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहीं रोशन खातून के लिए बगहा की होम्योपैथी उपचार एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, मुंबई में कीमोथेरेपी और रेडिएशन के बाद जब मरीज की हालत लगातार बिगड़ने लगी, तब उन्हें होम्योपैथिक इलाज की सलाह दी गई।

बताया जाता है कि रोशन खातून बच्चेदानी (यूटेरस) के कैंसर से पीड़ित थीं। पहले बिहार और फिर मुंबई के एक बड़े कैंसर अस्पताल में इलाज कराया गया, जहां कीमो और रेडिएशन के बाद आंतों में संक्रमण हो गया। इसके चलते मरीज की स्थिति गंभीर होती चली गई। आर्थिक तंगी और इलाज की जटिलताओं के कारण परिवार करीब तीन लाख रुपये के कर्ज में भी आ गया।इलाज से निराश परिजनों ने स्थानीय लोगों की सलाह पर मरीज को पश्चिम चंपारण जिले के बगहा स्थित होमियो कैंसर सेवा अस्पताल में दिखाया, जहां कैंसर चिकित्सक डॉ. पदम भानु सिंह ने इलाज शुरू किया।

परिजनों का कहना है कि दवा शुरू होने के महज पाँच दिनों के भीतर मरीज की उल्टी बंद हो गई, भूख लगने लगी, दर्द में राहत मिली और कमजोरी में सुधार हुआ। मरीज खुद उठकर चलने लगी, जिसे परिवार किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहा है।बताया गया कि तीन महीने के अंतराल पर दो बार उपचार कराया गया। 18 जनवरी 2026 को कराई गई जांच में मामूली सूजन को छोड़कर बच्चेदानी में गांठ नहीं मिलने की बात कही जा रही है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल है।मरीज रोशन खातून का कहना है कि होम्योपैथिक दवाएं उनके लिए वरदान साबित हुई हैं। उन्होंने बताया कि इस इलाज से कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ और अब वे खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रही हैं। उन्होंने अपने चिकित्सक डॉ. पदम भानु सिंह के प्रति आभार जताते हुए उनके दीर्घायु होने और अन्य मरीजों को भी राहत देने की कामना की।स्थानीय लोगों का कहना है कि कैंसर जैसे रोग के इलाज में डॉ. सिंह बिहार के लिए “रीढ़ की हड्डी” की तरह हैं और जरूरतमंद मरीजों के लिए आशा की किरण बने हुए हैं।

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