प्रभात इंडिया न्यूज़|आशीष पांडेय लौरिया 

लौरिया (पश्चिम चंपारण):पश्चिम चंपारण के ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप नंदनगढ़ में रविवार को आध्यात्मिकता और शांति का अनुपम दृश्य देखने को मिला, जब 13 देशों से आईं 100 बौद्ध भिक्षुणियों ने भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि धातु के साथ तीन घंटे तक विधिवत पूजा-अर्चना कर विश्व शांति का संदेश दिया।

नेपाल से नंदनगढ़ तक आध्यात्मिक यात्रा : यह अंतरराष्ट्रीय बौद्ध यात्रा नेपाल के शाक्य क्षेत्र से शुरू होकर वाल्मीकिनगर और दारुआवारी मार्ग से होते हुए नंदनगढ़ पहुंची। इस यात्रा में अमेरिका, जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, श्रीलंका, तिब्बत, कनाडा, ताइवान, इंडोनेशिया, भूटान, वियतनाम और भारत सहित कुल 13 देशों की बौद्ध भिक्षुणियां शामिल रहीं। खास बात यह रही कि इस दल में कोई भी पुरुष भिक्षु शामिल नहीं था।

तीन घंटे चला विशेष पूजा-अनुष्ठान  : नंदनगढ़ स्तूप की परिक्रमा के बाद भिक्षुणियों ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा और अस्थि धातु के समक्ष करीब तीन घंटे तक सामूहिक पूजा-अर्चना की। बुद्ध वंदना और मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

महाप्रजापति गौतमी की प्रेरणा  : अमेरिका स्थित लाइट ऑफ बुद्ध धम्मा फाउंडेशन की प्रमुख भिक्षुणी धम्मा दीना ने बताया कि यह यात्रा महाप्रजापति गौतमी के ऐतिहासिक संघर्ष की स्मृति से प्रेरित है, जिन्होंने 500 महिलाओं के साथ भिक्षुणी संघ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया था। उन्होंने कहा कि यह यात्रा बुद्ध के करुणा, शांति और समानता के संदेश को विश्व तक पहुंचाने का प्रयास है।

विश्व का सबसे बड़ा स्तूप: नंदनगढ़ताइवान की सूची फाउंडेशन की प्रतिनिधि भिक्षुणी वंदना ने कहा कि भगवान बुद्ध के चरणों से जुड़े स्थलों पर जाकर पूजा करना और उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही इस यात्रा का उद्देश्य है। वहीं द्विभाषीय माध्यम से ली इयान जिन ने नंदनगढ़ स्तूप को विश्व का सबसे बड़ा स्तूप बताते हुए यहां आकर गहरी शांति की अनुभूति होने की बात कही।

वैशाली के लिए रवाना हुआ दल : पूजा-अर्चना के बाद भिक्षुणियों का दल केसरिया होते हुए वैशाली के लिए रवाना हो गया, जहां आगे धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। इससे पूर्व बीकेजी की छात्राओं ने फूल वर्षा, स्वागत गीत और आरती के माध्यम से भिक्षुणियों का पारंपरिक स्वागत किया।

भारत को वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर नई पहचान : इस अवसर पर अमेरिका की पौला जीन शो, ऑस्ट्रेलिया की मलानी लुसी फेडम, थाईलैंड की लाम हा थी, वियतनाम की फाम थी कीम येन सहित कई देशों की प्रमुख बौद्ध भिक्षुणियां मौजूद रहीं। नंदनगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम बिहार ही नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक बौद्ध पर्यटन और आध्यात्मिक मानचित्र पर एक बार फिर मजबूती से स्थापित करता नजर आया।

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