प्रभात इंडिया न्यूज़/भीतहां अजय गुप्ता
मधुबनी, पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने उमरावती देवी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि मनुष्य यहां शुभ अथवा अशुभ जो जो कर्म करता है, पूर्व जन्म के शरीर से किये गये उन सब कर्मों का फल उसे अवश्य ही भोगना पड़ता है। उपयोग से प्राचीन कर्मों का तो क्षय होता है और फिर दूसरे नये-नये कर्मों का संचय बढ़ जाता है।जब तक मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति में सहायक धर्म का ज्ञान नहीं होता,तब तक यह कर्मों की परम्परा समाप्त नहीं होती है।
इस अवसर परिवारजन, रिश्तेदार सहित हजारों लोगों ने श्रद्धांजली अर्पित किया।अंत में भोजनोपरान्त कम्बल वितरित किया गया।